vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 75
श्लोक
5.1.75
क्रममाणं समीक्ष्याथ भुजगा: सागरंगमा:।
व्योम्नि तं कपिशार्दूलं सुपर्णमिव मेनिरे॥ ७५॥
अनुवाद
वानरों में श्रेष्ठ हनुमान् को आकाश में जाते देखकर समुद्र में विचरण करने वाले नाग उन्हें गरुड़ के समान समझने लगे। 75.
The serpents roaming in the ocean, on seeing Hanuman, the best of the apes going into the sky, began to consider him to be equal to Garuda. 75.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×