श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  5.1.72 
मेरुमन्दरसंकाशानुद‍्गतान् सुमहार्णवे।
अत्यक्रामन्महावेगस्तरङ्गान् गणयन्निव॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
वे अत्यन्त वेगवान वानर आगे बढ़े, मानो उस विशाल समुद्र में सुमेरु और मंदार पर्वत के समान उठती हुई ऊँची-ऊँची लहरों को गिन रहे हों।
 
Those extremely swift warrior monkeys moved ahead, as if counting the high waves rising like Mount Sumeru and Mount Mandara in that mighty ocean. 72.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)