श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.1.7 
स तस्य गिरिवर्यस्य तले नागवरायुते।
तिष्ठन् कपिवरस्तत्र ह्रदे नाग इवाबभौ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
बड़े-बड़े हाथियों से भरे उस पर्वत के समतल क्षेत्र पर खड़े हनुमान जी ऐसे प्रतीत हो रहे थे, जैसे जल के किसी जलाशय में खड़ा कोई विशाल हाथी हो।
 
Standing on the plain area of ​​that mountain filled with large elephants, Hanuman looked like a huge elephant standing in a reservoir of water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)