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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 69
श्लोक
5.1.69
सागरस्योर्मिजालानामुरसा शैलवर्ष्मणाम्।
अभिध्नंस्तु महावेग: पुप्लुवे स महाकपि:॥ ६९॥
अनुवाद
महान और तेज वानर हनुमान अपनी छाती से समुद्र की लहरों को कुचलते हुए आगे बढ़े, जो पहाड़ों के समान ऊंची थीं।
The great and swift ape Hanuman advanced, crushing with his chest the waves of the ocean which were as high as mountains.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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