श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.1.64 
तस्य वानरसिंहस्य प्लवमानस्य सागरम्।
कक्षान्तरगतो वायुर्जीमूत इव गर्जति॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
समुद्र पार करते समय वानर सिंह हनुमान की काँख से निकली वायु मेघ के समान गर्जना कर रही थी। 64.
 
While crossing the ocean, the air coming out from the armpit of the monkey lion Hanuman roared like a cloud. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)