श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.1.54 
पुष्पौघेण सुगन्धेन नानावर्णेन वानर:।
बभौ मेघ इवोद्यन् वै विद्युद‍्गणविभूषित:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
अनेक रंग के सुगन्धित पुष्पों से सुशोभित वीर वानर हनुमान्‌, बिजली से सुशोभित होकर उड़ते हुए मेघ के समान दिख रहे थे।
 
The brave monkey Hanuman, adorned with a pile of fragrant flowers of many colours, looked like a rising cloud, adorned with lightning. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)