श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.1.51 
स नानाकुसुमै: कीर्ण: कपि: साङ्कुरकोरकै:।
शुशुभे मेघसंकाश: खद्योतैरिव पर्वत:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
मेघ के समान विशाल हनुमान् जी अपने साथ खींचे हुए वृक्षों की कोंपलों और फूलों से आच्छादित हो रहे थे और जुगनुओं की चमक से प्रकाशित पर्वत के समान दिख रहे थे॥51॥
 
Hanuman, as huge as a cloud, was covered with the sprouts and flowers of the trees that he had pulled along with him and looked like a mountain illuminated by the twinkling of fireflies. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)