श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.1.49 
सुपुष्पिताग्रैर्बहुभि: पादपैरन्वित: कपि:।
हनूमान् पर्वताकारो बभूवाद्भुतदर्शन:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
फूलों से सुशोभित अनेक वृक्षों के बीच में पर्वत के समान शोभायमान हनुमानजी अद्भुत शोभा पा रहे थे ॥49॥
 
Joined with many trees whose branches were decorated with flowers, Hanuman, who was like a mountain, appeared wonderfully splendid. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)