vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 39-40h
श्लोक
5.1.39-40h
यथा राघवनिर्मुक्त: शर: श्वसनविक्रम:॥ ३९॥
गच्छेत् तद्वद् गमिष्यामि लंकां रावणपालिताम्।
अनुवाद
जैसे भगवान् रामजी का छोड़ा हुआ बाण वायु के वेग से चलता है, वैसे ही मैं रावण द्वारा पालित लंकापुरी को जाऊँगा॥ 39 1/2॥
Just as the arrow shot by Lord Rama moves with the speed of the wind, in the same manner I shall go to Lankapuri, nurtured by Ravana.॥ 39 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×