श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.1.28 
शुश्रुवुश्च तदा शब्दमृषीणां भावितात्मनाम्।
चारणानां च सिद्धानां स्थितानां विमलेऽम्बरे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन्होंने निर्मल आकाश में स्थित महर्षियों, चारणों और सिद्धों के ये वचन सुने - ॥28॥
 
At that time he heard the following words of the great sages, Charanas and Siddhas who were standing in the clear sky - ॥28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)