| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना » श्लोक 23-25 |
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| | | | श्लोक 5.1.23-25  | पानभूमिगतं हित्वा हैममासवभाजनम्।
पात्राणि च महार्हाणि करकांश्च हिरण्मयान्॥ २३॥
लेह्यानुच्चावचान् भक्ष्यान् मांसानि विविधानि च।
आर्षभाणि च चर्माणि खड्गांश्च कनकत्सरून्॥ २४॥
कृतकण्ठगुणा: क्षीबा रक्तमाल्यानुलेपना:।
रक्ताक्षा: पुष्कराक्षाश्च गगनं प्रतिपेदिरे॥ २५॥ | | | | | | अनुवाद | | वे मद्यपात्र, बहुमूल्य बर्तन, सोने के घड़े, नाना प्रकार के भोज्य पदार्थ, चटनी, नाना प्रकार के फलों के गूदे, बैल की खाल से बनी ढालें, सोने की मूठ वाली तलवारें, गले में मालाएं पहने, लाल फूल और चंदन का लेप लगाए, खिले हुए कमल के समान सुन्दर, लाल नेत्रों वाले, मदमस्त विद्याधर भयभीत होकर आकाश में चले गए। | | | | Leaving behind the golden liquor vessels, costly utensils, golden pitchers, various eatables, chutneys, pulps of various fruits, shields made of bull's hide and swords with golden handles, wearing garlands around their necks, applying red flowers and sandalwood paste, looking beautiful like blooming lotus flowers and having red eyes, those intoxicated Vidyadharas, frightened, went into the sky. | |
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