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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 206
श्लोक
5.1.206
स महामेघसंकाशं समीक्ष्यात्मानमात्मवान्।
निरुन्धन्तमिवाकाशं चकार मतिमान् मतिम्॥ २०६॥
अनुवाद
मन को वश में करने वाले बुद्धिमान हनुमान्जी ने आकाश को घेरे हुए महामेघ के समान विशाल उनके शरीर को देखकर इस प्रकार विचार किया - ॥206॥
The wise Hanuman, who had control over his mind, seeing his body as huge as a cloud of great clouds blocking the sky, thought to himself thus - ॥206॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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