श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 203
 
 
श्लोक  5.1.203 
प्राप्तभूयिष्ठपारस्तु सर्वत: परिलोकयन्।
योजनानां शतस्यान्ते वनराजीं ददर्श स:॥ २०३॥
 
 
अनुवाद
लगभग सौ योजन की दूरी पर समुद्र पार करने के बाद जब उन्होंने चारों ओर देखा तो उन्हें एक हरा-भरा वन दिखाई दिया।
 
After crossing almost the sea at the end of a hundred yojanas, when he looked in all directions he saw a lush green forest range.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)