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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 201
श्लोक
5.1.201
यस्य त्वेतानि चत्वारि वानरेन्द्र यथा तव।
धृतिर्दृष्टिर्मतिर्दाक्ष्यं स कर्मसु न सीदति॥ २०१॥
अनुवाद
हे वानरराज! जिस मनुष्य में आपके समान धैर्य, बुद्धि, बुद्धि और कौशल - ये चार गुण विद्यमान हैं, वह अपने कार्य में कभी असफल नहीं होता।॥201॥
Monkey lord! A man who has these four qualities like you - patience, understanding, intelligence and skill - never fails in his work.'॥ 201॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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