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ramayan 5.1.2: महाबली हनुमान जी एक ऐसा कार्य करना चाहते थे जो दूसरों के लिए कठिन था और जिसमें उन्हें किसी की सहायता नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपना सिर और गर्दन ऊपर उठाई। उस समय वे स्वस्थ बैल के समान दिखाई दे रहे थे॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 5.1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.1.2 
दुष्करं निष्प्रतिद्वन्द्वं चिकीर्षन् कर्म वानर:।
समुदग्रशिरोग्रीवो गवां पतिरिवाबभौ॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाबली हनुमान जी एक ऐसा कार्य करना चाहते थे जो दूसरों के लिए कठिन था और जिसमें उन्हें किसी की सहायता नहीं मिल रही थी। उन्होंने अपना सिर और गर्दन ऊपर उठाई। उस समय वे स्वस्थ बैल के समान दिखाई दे रहे थे॥ 2॥
 
Hanuman ji, the great monkey, wanted to perform a task which was difficult for others and he did not have anyone's help in that task. He raised his head and neck. At that time he appeared like a healthy bull.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)