श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 196-197h
 
 
श्लोक  5.1.196-197h 
ततस्तस्या नखैस्तीक्ष्णैर्मर्माण्युत्कृत्य वानर:॥ १९६॥
उत्पपाताथ वेगेन मन:सम्पातविक्रम:।
 
 
अनुवाद
मुख में प्रवेश करके उन वीर वानरों ने अपने तीखे नाखूनों से राक्षसी के प्राणों को छेद डाला और फिर मन के वेग से बाहर कूद पड़े।
 
Entering the mouth, those brave monkeys pierced the vital spots of the demoness with their sharp nails. After this, they jumped out with the speed of the mind. 196 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)