श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 194-195h
 
 
श्लोक  5.1.194-195h 
स तस्या विकृते वक्त्रे वज्रसंहनन: कपि:॥ १९४॥
संक्षिप्य मुहुरात्मानं निपपात महाकपि:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वज्र के समान शरीर वाले महावानर पवनकुमार ने अपना शरीर सिकोड़कर उसके विशाल मुख में गिर पड़े ॥194 1/2॥
 
Thereafter, Pawan Kumar, the great monkey with thunderbolt body, contracted his body and fell into her monstrous mouth. 194 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)