श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 189-190
 
 
श्लोक  5.1.189-190 
तद् दृष्ट्वा चिन्तयामास मारुतिर्विकृताननाम्॥ १८९॥
कपिराज्ञा यथाख्यातं सत्त्वमद्भुतदर्शनम्।
छायाग्राहि महावीर्यं तदिदं नात्र संशय:॥ १९०॥
 
 
अनुवाद
उस भयानक मुख वाली राक्षसी को देखकर पवनपुत्र हनुमान ने सोचा, 'यह निःसंदेह वही पराक्रमी, छाया पकड़ने वाली प्राणी है, जिसके विषय में वानरराज सुग्रीव ने कहा था।' 189-190
 
Seeing that terrifying-faced demoness, Hanuman, the son of the wind, thought, 'This is undoubtedly the mighty, shadow-catching creature that the monkey king Sugreeva had spoken about.' 189-190
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)