श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  5.1.170 
तं दृष्ट्वा वदनान्मुक्तं चन्द्रं राहुमुखादिव।
अब्रवीत् सुरसा देवी स्वेन रूपेण वानरम्॥ १७०॥
 
 
अनुवाद
राहु के मुख से चन्द्रमा के छूटने के समान हनुमान् को अपने मुख से छूटा हुआ देखकर देवी सुरसा अपने वास्तविक रूप में प्रकट हुईं और वीर वानर से बोलीं -॥170॥
 
Seeing Hanuman freed from her mouth like the Moon released from the mouth of Rahu, Goddess Surasā appeared in her real form and said to the brave monkey -॥ 170॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)