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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 164
श्लोक
5.1.164
तदैव हनुमान् वीर: सप्ततिं योजनोच्छ्रित:।
चकार सुरसा वक्त्रमशीतिं योजनोच्छ्रितम्॥ १६४॥
अनुवाद
तब वीर हनुमान् तुरन्त सत्तर योजन ऊँचे उठ गए। अब सुरसा ने अपना मुख अस्सी योजन ऊँचा कर लिया ॥164॥
Then the valiant Hanuman immediately rose seventy yojanas in height. Now Surasa made her face eighty yojanas high.॥ 164॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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