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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 163
श्लोक
5.1.163
बभूव हनुमान् वीर: पञ्चाशद् योजनोच्छ्रित:।
चकार सुरसा वक्त्रं षष्टिं योजनमुच्छ्रितम्॥ १६३॥
अनुवाद
यह देखकर वीर हनुमान पचास योजन ऊंचे उठ गए, तब सुरसा ने अपना मुंह साठ योजन ऊंचा उठा लिया।
Seeing this, the brave Hanuman rose fifty yojanas in height. Then Surasa raised her mouth sixty yojanas in height.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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