श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  5.1.157 
तं प्रयान्तं समुद्वीक्ष्य सुरसा वाक्यमब्रवीत्।
बलं जिज्ञासमाना सा नागमाता हनूमत:॥ १५७॥
 
 
अनुवाद
फिर भी हनुमान् को जाते देख उनका बल जानने की इच्छा रखने वाली माता सर्पिणी सुरसा ने उनसे कहा -॥157॥
 
Still, seeing Hanuman going, the mother snake Surasa, who wanted to know about his strength, said to him -॥ 157॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)