श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 153
 
 
श्लोक  5.1.153 
अन्यकार्यविषक्तस्य बद्धवैरस्य राक्षसै:।
तस्य सीता हृता भार्या रावणेन यशस्विनी॥ १५३॥
 
 
अनुवाद
दूसरों के कल्याण में लगे हुए श्री रामजी ने राक्षसों से द्वेष कर लिया, इसलिए रावण ने उनकी सुशोभित पत्नी सीता का हरण कर लिया॥153॥
 
While engaged in the welfare of others, Shri Ram developed enmity with the demons. Therefore, Ravana abducted his illustrious wife, Sita.॥ 153॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)