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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 151
श्लोक
5.1.151
वर एष पुरा दत्तो मम धात्रेति सत्वरा।
व्यादाय वक्त्रं विपुलं स्थिता सा मारुते: पुर:॥ १५१॥
अनुवाद
पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने मुझे यह वरदान दिया था ।’ ऐसा कहकर वह तुरन्त ही हनुमानजी के सामने मुँह खोले खड़ी हो गई ॥151॥
In the past Lord Brahma had granted me this boon.' Having said this she immediately stood before Hanuman with her mouth wide open.॥ 151॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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