श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.1.15 
पीडॺमानस्तु बलिना महेन्द्रस्तेन पर्वत:।
रीतीर्निर्वर्तयामास काञ्चनाञ्जनराजती:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पवनपुत्र के बल से दबे महेंद्रगिरि से स्वर्ण, रजत और काले रंग के जलस्रोत फूटने लगे।
 
Mahendragiri, weighed down by the mighty son of the wind, began to gush out golden, silver and black coloured water sources. 15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)