श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 148-149
 
 
श्लोक  5.1.148-149 
एवमुक्ता तु सा देवी दैवतैरभिसत्कृता।
समुद्रमध्ये सुरसा बिभ्रती राक्षसं वपु:॥ १४८॥
विकृतं च विरूपं च सर्वस्य च भयावहम्।
प्लवमानं हनूमन्तमावृत्येदमुवाच ह॥ १४९॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के आदरपूर्वक ऐसा कहने पर देवी सुरसा ने समुद्र के बीच में राक्षसी का रूप धारण कर लिया। उनका रूप अत्यंत भयानक, कुरूप और सबके लिए भयावह था। उन्होंने समुद्र पार करते हुए हनुमानजी को घेर लिया और उनसे इस प्रकार बोलीं -॥148-149॥
 
When the gods respectfully said this, Goddess Surasa assumed the form of a demoness in the middle of the ocean. Her form was very terrifying, ugly and frightening for everyone. She surrounded Hanuman ji as he was crossing the ocean and spoke to him thus -॥148-149॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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