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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 136
श्लोक
5.1.136
तद् द्वितीयं हनुमतो दृष्ट्वा कर्म सुदुष्करम्।
प्रशशंसु: सुरा: सर्वे सिद्धाश्च परमर्षय:॥ १३६॥
अनुवाद
हनुमानजी द्वारा किया गया यह दूसरा अत्यंत कठिन कार्य देखकर समस्त देवता, सिद्ध और महर्षि उनकी स्तुति करने लगे॥136॥
Seeing this second extremely difficult task performed by Hanuman, all the Gods, Siddhas and Maharishis started praising him.॥ 136॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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