vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
»
सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
»
श्लोक 132
श्लोक
5.1.132
इत्युक्त्वा पाणिना शैलमालभ्य हरिपुङ्गव:।
जगामाकाशमाविश्य वीर्यवान् प्रहसन्निव॥ १३२॥
अनुवाद
ऐसा कहकर वानरराज हनुमानजी ने मुस्कुराते हुए मैनाक को हाथ से स्पर्श किया और आकाश में ऊपर उठकर चलने लगे।
Saying this the mighty Hanuman, the chief of the monkeys, smilingly touched Mainaka with his hand and rose up in the sky and began to walk. 132.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×