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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना
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श्लोक 126
श्लोक
5.1.126
अस्मिँल्लवणतोये च प्रक्षिप्त: प्लवगोत्तम।
गुप्तपक्ष: समग्रश्च तव पित्राभिरक्षित:॥ १२६॥
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! तुम्हारे पिता ने मुझे इस लवण समुद्र में डालकर मेरे पंखों की रक्षा की और मैं अपने समस्त अंगों सहित सुरक्षित रहा॥126॥
O best of the monkeys! By throwing me into this sea of salt, your father protected my wings and I remained safe with all my parts.॥ 126॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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