श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  5.1.118 
वेगवन्त: प्लवन्तो ये प्लवगा मारुतात्मज।
तेषां मुख्यतमं मन्ये त्वामहं कपिकुञ्जर॥ ११८॥
 
 
अनुवाद
हे वानरों में श्रेष्ठ, हे पवनपुत्र! मैं तुम्हें समस्त वेगवान और उछलने वाले वानरों में श्रेष्ठ मानता हूँ ॥118॥
 
O best of the apes, O son of the wind! I consider you to be the best among all the swift and leaping monkeys. ॥ 118॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)