श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 116-117h
 
 
श्लोक  5.1.116-117h 
तिष्ठ त्वं हरिशार्दूल मयि विश्रम्य गम्यताम्।
तदिदं गन्धवत् स्वादु कन्दमूलफलं बहु॥ ११६॥
तदास्वाद्य हरिश्रेष्ठ विश्रान्तोऽथ गमिष्यसि।
 
 
अनुवाद
अतः हे वानरश्रेष्ठ! कृपया कुछ देर मुझ पर विश्राम करें, फिर जा सकते हैं। इस स्थान पर अनेक सुगंधित एवं स्वादिष्ट कंद, मूल और फल हैं। हे वानरश्रेष्ठ! इनका स्वाद लें और फिर कुछ देर विश्राम करें। उसके बाद आगे बढ़ सकते हैं।॥116 1/2॥
 
‘Therefore, O best of the monkeys! Please rest on me for some time, then you can go. At this place there are many fragrant and tasty tubers, roots and fruits. O head of the monkeys! Taste them and then rest for some time. After that you can proceed further.॥ 116 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)