स सागरजलं भित्त्वा बभूवात्युच्छ्रितस्तदा।
यथा जलधरं भित्त्वा दीप्तरश्मिर्दिवाकर:॥ १०२॥
अनुवाद
जैसे सूर्य अपनी प्रखर किरणों से बादलों का आवरण भेदकर ऊपर उठता है, उसी प्रकार उस समय वह पर्वत समुद्र के जल को भेदकर बहुत ऊँचा उठ गया ॥102॥
Just as the Sun with its radiant rays rises by piercing the cover of clouds, similarly at that time that mountain rose to a very high height after piercing the waters of the ocean. ॥102॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥