श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 1: हनुमान् जी के द्वारा समुद्र का लङ्घन, मैनाक के द्वारा उनका स्वागत, सुरसा पर उनकी विजय तथा सिंहिका का वध,लंका की शोभा देखना  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  5.1.101 
हिरण्यगर्भो मैनाको निशम्य लवणाम्भस:।
उत्पपात जलात् तूर्णं महाद्रुमलतावृत:॥ १०१॥
 
 
अनुवाद
यह सुनते ही बड़े-बड़े वृक्षों और लताओं से आच्छादित सुवर्णमय मैनाक पर्वत तुरंत ही क्षार सागर के जल से ऊपर उठ गया ॥101॥
 
On hearing this, the golden Mainak mountain, covered with large trees and creepers, immediately rose above the water of the alkaline ocean. ॥101॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)