श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 9: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  4.9.23-24h 
मदीयान् मन्त्रिणो बद्‍ध्वा परुषं वाक्यमब्रवीत्।
निग्रहे च समर्थस्य तं पापं प्रति राघव॥ २३॥
न प्रावर्तत मे बुद्धिर्भ्रातृगौरवयन्त्रिता।
 
 
अनुवाद
‘उसने मेरे मन्त्रियों को बन्दी बनाकर उन्हें कठोर फटकार लगाई। रघुवीर! यद्यपि मैं स्वयं उस पापी को बन्दी बनाने में समर्थ था, तथापि अपने भाई के प्रति गुरु-भाव के कारण मेरे मन में ऐसा विचार नहीं आया।॥23 1/2॥
 
‘He imprisoned my ministers and reprimanded them harshly. Raghuveer! Although I myself was capable of imprisoning that sinner, yet due to the feeling of guru towards my brother, such a thought did not come to my mind.॥ 23 1/2॥
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