श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 9: सुग्रीव का श्रीरामचन्द्रजी को वाली के साथ अपने वैर होने का कारण बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.9.14 
मया त्वेतद् वच: श्रुत्वा याचित: स परंतप:।
शापयित्वा च मां पद‍्भ्यां प्रविवेश बिलं तत:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर मैंने शत्रुओं को पीड़ा देने वाले से अपने साथ चलने की प्रार्थना की, परन्तु उसने मुझे अपने पैरों की शपथ दिलाकर अकेले ही उस गड्ढे में प्रवेश किया॥14॥
 
On hearing this I requested the one who torments the enemies to accompany me, but he made me swear by his feet and entered the hole alone.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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