Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.8.39: (यद्यपि मेरे भाई का नाश भी दुःख का कारण है, तथापि) इस समय मुझे जो दुःख हो रहा है, वह उसके नाश होने पर ही दूर हो सकता है। मेरा सुख और जीवन उसके नाश पर ही निर्भर है॥ 39॥ | ramayan सर्ग 4.8: सुग्रीव का श्रीराम से अपना दुःख निवेदन करना और श्रीराम का उन्हें आश्वासन देते हुए दोनों भाइयों में वैर होने का कारण पूछना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तद्विनाशेऽपि मे दु:खं प्रमृष्टं स्यादनन्तरम्।
सुखं मे जीवितं चैव तद्विनाशनिबन्धनम्॥ ३९॥
अनुवाद
(यद्यपि मेरे भाई का नाश भी दुःख का कारण है, तथापि) इस समय मुझे जो दुःख हो रहा है, वह उसके नाश होने पर ही दूर हो सकता है। मेरा सुख और जीवन उसके नाश पर ही निर्भर है॥ 39॥
‘(Although the destruction of my brother is also a cause of sorrow, yet) the sorrow which I am feeling at this moment can only be removed when he is destroyed. My happiness and life depend on his destruction.॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥