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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 8: सुग्रीव का श्रीराम से अपना दुःख निवेदन करना और श्रीराम का उन्हें आश्वासन देते हुए दोनों भाइयों में वैर होने का कारण पूछना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.8.2 
सर्वथाहमनुग्राह्यो देवतानां न संशय:।
उपपन्नो गुणोपेत: सखा यस्य भवान् मम॥ २॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! इसमें कोई संदेह नहीं कि देवताओं ने मुझ पर बड़ी कृपा की है। मैं उनकी कृपा का पूर्णतः पात्र हूँ, क्योंकि आप जैसे महापुरुष मेरे मित्र बन गए हैं।
 
Lord! There is no doubt that the gods have shown great kindness to me. I am completely deserving of their grace because a great man like you has become my friend.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)