श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.7.21 
मया च यदिदं वाक्यमभिमानात् समीरितम्।
तत्त्वया हरिशार्दूल तत्त्वमित्युपधार्यताम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! तुम ठीक से समझ लो कि मैंने अहंकारवश बालि आदि को मारने की बात कही है॥ 21॥
 
O best of the monkeys! You must understand correctly that I have arrogantly spoken about killing Vali etc.॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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