श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.7.16 
प्रकृतिस्थस्तु काकुत्स्थ: सुग्रीवचनात् प्रभु:।
सम्परिष्वज्य सुग्रीवमिदं वचनमब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थकुलभूषण भगवान श्री राम ने अपने मित्र सुग्रीव को हृदय से लगा लिया और इस प्रकार बोले-॥16॥
 
Kakutsthakulbhushan Lord Shri Ram hugged his friend Sugriva to his heart and said thus - ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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