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ramayan 4.7.15: जब सुग्रीव ने मधुर वचनों से उन्हें सान्त्वना दी, तब श्री रघुनाथजी ने अपने वस्त्र के किनारे से उनके आँसुओं से भीगे मुख को पोंछा।   |   ramayan सर्ग 4.7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.7.15 
मधुरं सान्त्वितस्तेन सुग्रीवेण स राघव:।
मुखमश्रुपरिक्लिन्नं वस्त्रान्तेन प्रमार्जयत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब सुग्रीव ने मधुर वचनों से उन्हें सान्त्वना दी, तब श्री रघुनाथजी ने अपने वस्त्र के किनारे से उनके आँसुओं से भीगे मुख को पोंछा।
 
When Sugreeva consoled Him in sweet words, Sri Raghunatha wiped his tears-soaked face with the edge of his garment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)