श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.7.13 
शोकेनाभिप्रपन्नस्य जीविते चापि संशय:।
स शोकं त्यज राजेन्द्र धैर्यमाश्रय केवलम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! शोक से घिरे हुए मनुष्य के जीवन में संशय उत्पन्न होते हैं। अतः शोक का त्याग करके केवल धैर्य धारण करो॥13॥
 
‘Rajendra! Doubts arise in the life of a person overcome with grief. Therefore, you should abandon grief and have only patience.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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