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श्लोक 4.7.13  |
शोकेनाभिप्रपन्नस्य जीविते चापि संशय:।
स शोकं त्यज राजेन्द्र धैर्यमाश्रय केवलम्॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| राजेन्द्र! शोक से घिरे हुए मनुष्य के जीवन में संशय उत्पन्न होते हैं। अतः शोक का त्याग करके केवल धैर्य धारण करो॥13॥ |
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| ‘Rajendra! Doubts arise in the life of a person overcome with grief. Therefore, you should abandon grief and have only patience.॥ 13॥ |
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