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श्लोक 4.7.10  |
बालिशस्तु नरो नित्यं वैक्लव्यं योऽनुवर्तते।
स मज्जत्यवश: शोके भाराक्रान्तेव नौर्जले॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| जो मूर्ख मनुष्य सदैव चिंता में डूबा रहता है, वह जल के भार से दबी हुई नाव के समान शोक में डूब जाता है॥10॥ |
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| The foolish man who is always in a state of anxiety is forced to drown in grief, like a boat weighed down by the weight of water.॥ 10॥ |
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