श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 7: सुग्रीव का श्रीराम को समझाना तथा श्रीराम का सुग्रीव को उनकी कार्य सिद्धि का विश्वास दिलाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.7.10 
बालिशस्तु नरो नित्यं वैक्लव्यं योऽनुवर्तते।
स मज्जत्यवश: शोके भाराक्रान्तेव नौर्जले॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य सदैव चिंता में डूबा रहता है, वह जल के भार से दबी हुई नाव के समान शोक में डूब जाता है॥10॥
 
The foolish man who is always in a state of anxiety is forced to drown in grief, like a boat weighed down by the weight of water.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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