श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.67.42 
महद्भिरुच्छ्रितं शृङ्गैर्महेन्द्रं स महाबल:।
विचचार हरिश्रेष्ठो महेन्द्रसमविक्रम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
महाशिखरों से भी ऊँचे प्रतीत होने वाले महेन्द्र पर्वत पर आरूढ़ होकर इन्द्र के समान पराक्रमी वीरों में श्रेष्ठ हनुमान् जी इधर-उधर विचरण करने लगे॥42॥
 
Mounted on Mahendra Mountain, which appeared to be higher than the great peaks, Hanuman, the best of mighty warriors, as mighty as Indra, started strolling here and there. 42॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas