vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना
»
श्लोक 39
श्लोक
4.67.39
ततस्तु मारुतप्रख्य: स हरिर्मारुतात्मज:।
आरुरोह नगश्रेष्ठं महेन्द्रमरिमर्दन:॥ ३९॥
अनुवाद
ऐसा कहकर पवनपुत्र हनुमान्जी शत्रुओं का संहार करने में वायु के समान पराक्रमी होकर पर्वतों में श्रेष्ठ महेन्द्र पर चढ़ गये।
Saying this, Hanuman, the son of the wind and mighty as the wind to kill the enemies, climbed upon Mahendra, the best among the mountains.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas