श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  4.67.34-35h 
स्थास्यामश्चैकपादेन यावदागमनं तव॥ ३४॥
त्वद‍्गतानि च सर्वेषां जीवनानि वनौकसाम्।
 
 
अनुवाद
"जब तक तुम यहाँ वापस नहीं आओगे, हम एक पैर पर खड़े होकर तुम्हारी प्रतीक्षा करेंगे; क्योंकि हम सब वानरों का जीवन तुम पर ही निर्भर है।" ॥34 1/2॥
 
"Until you come back here, we will stand on one leg waiting for you; because the life of all of us monkeys is dependent on you." ॥ 34 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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