श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  4.67.32-33h 
तव कल्याणरुचय: कपिमुख्या: समागता:॥ ३२॥
मङ्गलान्यर्थसिद्धॺर्थं करिष्यन्ति समाहिता:।
 
 
अनुवाद
‘यहाँ आये हुए सभी महावानर आपके कल्याण की कामना करते हैं। अब वे इसी कार्य को सम्पन्न करने के उद्देश्य से एकाग्रचित्त होकर आपके लिए मंगलाचरण, स्वस्तिवाचन आदि अनुष्ठान करेंगे। 32 1/2॥
 
‘All the great monkeys who have come here wish for your well-being. Now, with the aim of accomplishing this task, they will be concentrated and will perform the rituals of auspiciousness, Swastivachan etc. for you. 32 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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