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ramayan 4.67.31-32h: वीर! केसरीपुत्र! पवनपुत्र वेगवान! पितामह! आपने अपने स्वजनों के महान शोक का नाश कर दिया।   |   ramayan सर्ग 4.67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  4.67.31-32h 
वीर केसरिण: पुत्र वेगवन् मारुतात्मज॥ ३१॥
ज्ञातीनां विपुल: शोकस्त्वया तात प्रणाशित:।
 
 
अनुवाद
वीर! केसरीपुत्र! पवनपुत्र वेगवान! पितामह! आपने अपने स्वजनों के महान शोक का नाश कर दिया।
 
Valiant! Son of Kesari! Swift son of Pawan! Father! You have destroyed the great grief of your relatives. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)