Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.67.3: वे उसके चारों ओर खड़े होकर उसे बड़े आनंद और आश्चर्य से देखने लगे, जैसे सभी लोगों ने उत्साही नारायण अवतार वामन को देखा था।   |   ramayan सर्ग 4.67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.67.3 
प्रहृष्टा विस्मिताश्चापि ते वीक्षन्ते समन्तत:।
त्रिविक्रमं कृतोत्साहं नारायणमिव प्रजा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वे उसके चारों ओर खड़े होकर उसे बड़े आनंद और आश्चर्य से देखने लगे, जैसे सभी लोगों ने उत्साही नारायण अवतार वामन को देखा था।
 
They stood around him and looked at him with great joy and astonishment, just as all the people had seen the enthusiastic Narayana avatar Vamana.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)