Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.67.21-22: हे वानरों! तुम देखोगे कि मैं विशाल मेरु पर्वत के समान विशाल शरीर धारण करके आकाश को ढँककर आगे बढ़ूँगा, आकाश को निगल जाऊँगा, बादलों को छिन्न-भिन्न कर दूँगा, पर्वतों को हिला दूँगा और एकाग्रचित्त होकर आगे बढ़कर समुद्र को भी सुखा दूँगा॥ 21-22॥ | ramayan सर्ग 4.67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे वानरों! तुम देखोगे कि मैं विशाल मेरु पर्वत के समान विशाल शरीर धारण करके आकाश को ढँककर आगे बढ़ूँगा, आकाश को निगल जाऊँगा, बादलों को छिन्न-भिन्न कर दूँगा, पर्वतों को हिला दूँगा और एकाग्रचित्त होकर आगे बढ़कर समुद्र को भी सुखा दूँगा॥ 21-22॥
O monkeys! You will see that, assuming a huge body like the mighty mountain Meru, I will proceed forward covering the heavens and swallowing the sky, I will shatter the clouds, shake the mountains and by leaping ahead with single-minded concentration, I will dry up even the ocean.॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥