श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 67: हनुमान जी का समुद्र लाँघने के लिये उत्साह प्रकट करना, जाम्बवान् के द्वारा उनकी प्रशंसा तथा वेगपूर्वक छलाँग मारने के लिये हनुमान जी का महेन्द्र पर्वत पर चढ़ना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.67.13 
ममोरुजङ्घावेगेन भविष्यति समुत्थित:।
समुत्थितमहाग्राह: समुद्रो वरुणालय:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह वरुण का निवासस्थान समुद्र मेरी जांघों और पिंडलियों के बल से क्षुब्ध हो उठेगा और उसमें रहने वाले बड़े-बड़े मगरमच्छ ऊपर आ जाएँगे॥13॥
 
This ocean, the abode of Varuna, will be agitated by the force of my thighs and calves and the large crocodiles living within it will come up.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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